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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 67
घषण्मासात्मक दिनरात्रि व्यवस्था मेरौ मेषादिचक्रार्थे देवा: पश्यन्ति भास्करम्‌ । सकृदेवोदितं तद्गदसुराश्व तुलादिगम्‌ ॥
मेरु पर्वत (उत्तर ध्रुव) वासी देवता मेषादि छ: राशियों में एक बार उदित सूर्य. को ही देखते रहते हैं। अर्थात्‌ मेषादि छ: राशियों में ६ मास तक सूर्य क्षितिज के ऊपर रहते है सूर्यास्त ही नहीं होता। इसी प्रकार असुर लोग (कुमेरु या दक्षिण श्रुववासी) तुलादि छ: राशियों में ६ मास तक सूर्य को उदित ही देखते हैं।
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