मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 63
द्विमासात्मक दिनरात्रि व्यवस्था ऊने भूवृत्तपादे तु द्विज्यापक्रमयोजनै:। धनुर्मगस्थ: सविता देवभागे न दृश्यते ॥
द्विज्या (दो राशियों की ज्या) की क्रान्ति से प्राप्त योजन (श्लोक ५९ के अनुसार) मान को भूवृत्तपाद (भूपरिध/४) से घटाने पर जो शेष योजन हो, निरक्ष देश से उतने योजन पर देव भाग में (उत्तरगोल में) धनु और
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें