द्विमासात्मक दिनरात्रि व्यवस्था
ऊने भूवृत्तपादे तु द्विज्यापक्रमयोजनै:।
धनुर्मगस्थ: सविता देवभागे न दृश्यते ॥
द्विज्या (दो राशियों की ज्या) की क्रान्ति से प्राप्त योजन (श्लोक ५९ के अनुसार) मान को भूवृत्तपाद (भूपरिध/४) से घटाने पर जो शेष योजन हो, निरक्ष देश से उतने योजन पर देव भाग में (उत्तरगोल में) धनु और
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