निरक्ष देश से पूर्वोक्त विधि से प्राप्त योजनमान (६६ अक्षांश) तक ही ६० घटी के अन्दर दिन और रात्रि की क्षयवृद्धि होती है तथा अहोरात्र का मान ६० घटी होता है। इससे (६६ से) अधिक अक्षांश होने पर दिन रात्रि व्यवस्था भिन्न हो जाती है क्योंकि उन स्थानों में यह भगोल (राशिचक्र) विपरीत भ्रमण करता है।
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