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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 62
बषष्टिघट्यत्मक दिन-रात्रि व्यवस्था तदन्‍्तरेषपि षष्ट्यन्ते क्षयवृद्धी अहर्निशो: । परतो विपरीतोड्यं भगोल: परिवर्तते ॥
निरक्ष देश से पूर्वोक्त विधि से प्राप्त योजनमान (६६ अक्षांश) तक ही ६० घटी के अन्दर दिन और रात्रि की क्षयवृद्धि होती है तथा अहोरात्र का मान ६० घटी होता है। इससे (६६ से) अधिक अक्षांश होने पर दिन रात्रि व्यवस्था भिन्‍न हो जाती है क्‍योंकि उन स्थानों में यह भगोल (राशिचक्र) विपरीत भ्रमण करता है।
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