अयनान्ते विलोमेन देवासुरविभागयो:।
नाडीषष्ट्या सकृदहर्निशाप्यस्मिन् सकृत् तथा ॥
मिथुनान्त में उत्तर गोल में ६० घटी का दिन तथा दक्षिण गोल में ६० घटी को रात्रि इसी प्रकार धनुरन्त में दक्षिण गोल में ६० घटी का दिन तथा उत्तर गोल मे ६० घटी की रात्रि होती है।
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