तुलादि ६ राशियों में उक्त क्रम से विपरीत दिनरात्रि की क्षय वृद्धि देवों एवं असुरों के भागों में होती है। अर्थात् तुलादि राशियों में उत्तर में दिन का ह्रास, रात्रि की वृद्धि तथा दक्षिण गोल में दिन की वृद्धि एवं रात्रि का ह्रास होता है। इस प्रकार ह्वास-वृद्धि के क्रम को पहले (स्पष्टाधिकार श्छोक सं. ६०-६१ ) में देश (अक्षांश) और सूर्य क्रान्ति द्वारा ज्ञात करने की विधि बतलाई गई है।
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