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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 57
मेषादा तु॒दिवावृद्धिरुदगुत्तरतोड्धिका । देवांशे च क्षपाहानिर्विपरीतं तथाउउसुरे ॥
मेषादि ६ राशियों में निरक्षदेश में उत्तरोत्तर क्रम से देवभाग में दिन मान की वृद्धि होती है तथा रात्रि मान का ह्रास होता है। इससे विपरीत असुर भाग में अर्थात्‌ निरक्ष देश से दक्षिण दिशा में जैसे जैसे बढ़ते जायेगें दिन का ह्रास तथा रात्रि की वृद्धि होती जायेगी।
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