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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 54
भूमे: समत्वदर्शने कारणम्‌ अल्पकायतया लोका: स्वस्थानात्‌ सर्वतों मुखम्‌ । पश्यन्ति वृत्तामप्येनां चक्राकारां वसुन्धराम्‌ ।।
पृथ्वी की अपेक्षा मनुष्य अत्यल्पकाय (लघुशरीरवाला) है। अत: अपने स्थान से चारों ओर गोलाकार होते हुये भी पृथ्वी को चक्राकार (चिपिटा) देखता है।
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