देवताओं एवं असुरों का दिनार्ध (भध्याहन) एवं रात्र्यर्ध (मध्य रात्रि) अयनों के अन्त में एक दूसरे के विपरीत होते हैं। अर्थात् उत्तरायण (सायन मिथुन) के अन्त में सूर्य के रहने पर देवों का मध्याहन और असुरों की मध्यरात्रि तथा धनुरन्त में असुरों का मध्याहन और देवों की मध्यरात्रि होती हैं। देवता और असुर एक दूसरे की अपेक्षा अपने को ऊपर स्थित मानते हैं, तथा दूसरे को अपने से नीचे की ओर मानते हैं।
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