उक्त कारणों से (मेष से कन्या पर्यन्त) सूर्य के देवभाग में क्षितिज से ऊपर तथा खमध्य के आसन्न रहने से उत्तर गोल में सूर्य की रश्मियाँ तीव्र होती हैं जिनसे ग्रीष्म ऋतु में उत्तरगोल में गर्मी (उष्मा) होती है। इसी प्रकार तुलादि छ: राशियों में दक्षिण गोल में सूर्य के रहने से हेमन्त ऋतु में गर्मी होती है। इस से विपरीत स्थिति अर्थात् उत्तर गोल में हेमन्त ऋतु में शीत तथा दक्षिण में ग्रीष्प ऋतु में शीत (सर्दी) होती है।
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