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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 45
मेरौ रवेदर्शनम्‌ मेषादौ देवभागस्थे देवानां याति दर्शनम्‌ । असुराणां तुलादौ तु सूर्यस्तद्भागसञ्चर: ।।
मेषादि छ: राशियों में स्थित रहने पर सूर्य का दर्शन देव भाग में तथा तुलादि छ: राशियों में स्थित रहने पर सूर्य का दर्शन असुरों के भाग में होता है। मेषादि से कन्यान्त पर्यन्त छ: राशियों में भ्रमण करता हुआ सूर्य विषवुत (नाडी) वृत्त से उत्तर में ही रहता है अत: लगभग ६ मास पर्यन्त सूर्य का दर्शन उत्तर गोल में होता है। इसी प्रकार तुलादि से मीनान्त पर्यन्त ६ रशियों में सूर्य नाडी वृत्त से दक्षिण में रहता है अत: ६ मास पर्यन्त सूर्य का दर्शन दक्षिण गोल में ही होता है।
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