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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 44
अतो नाक्षोच्छुयस्तासु श्रुवयो: क्षितिजस्थयो: । नवतिलम्बकांशास्तु मेरावक्षांशकास्तथा ।।
जो निरक्षदेश (विषुवतीय प्रदेशों) में स्थित हैं उनके लिए दोनों भागों (उत्तर-दक्षिण) में ध्रुव तारा क्षितिज में स्थित होता है। अत: क्षितिजस्थ दोनों ध्रुव तारों (उत्तर-दक्षिण) की क्षितिज पर ऊँचाई न होने से उन (विषुवतीय) प्रदेशों में अक्षांश शून्य तथा लम्बांश ९० होता है। इसके विपरीत दोनों मेरु प्रदेशों में अक्षांश ९० तथा लम्बांश ० शून्य होता है।
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