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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 42
तासामुपरिगो यांति विषुवस्थो दिवाकर:। न तासु विषुवच्छाया नाक्षस्योन्नतिरिष्यते ॥
नाडी वृत्त में स्थित (अर्थात्‌ सायनमेष राशि या सायनतुला राशि में स्थित) सूर्य उन चारों नगरों के ऊपर होता हुआ भ्रमण करता है। उन नगरों में विषुवच्छाया (पलभा) नहीं होती तथा अक्ष की उन्‍नति भी नहीं होती, अर्थात्‌ अक्षांश भी शून्य होता है।
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