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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 41
भूवृत्तपादविवरास्ताश्चान्योन्यं प्रतिष्ठिता: । ताभ्यश्चोत्तरगो मेरुस्तावानेवः सुराश्रय: ॥
पृथ्वी की परिधि के चतुर्थाश भाग के अन्तर पर ये चारों नगर स्थित है। इन चारों नगरों से उतनी ही दूरी (भूवृत्तपाद) पर उत्तर दिशा में सुमेरु पर्वत है जहाँ देवताओं का निवास है।
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