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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 4
देवासुराणामहोरात्रव्यवस्था प्रश्न: देवासुराणामन्योन्यमहोरात्र विपर्ययात्‌ । किमर्थ तत्‌ कथ॑ वा स्याद्‌ भानोर्भगणपूरणात्‌ ॥
देवताओं और असुरों की अहोरात्र व्यवस्था एक-दूसरे से विपरीत क्‍यों और कैसे होती है तथा सूर्य की भगण पूर्ति के साथ इनका अहोरात्र कैसे होता है?
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