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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 34
मेरो: स्थिति: अनेकरत्ननिचयो जाम्बूनदमयो गिरि: । भूगोलमध्यगो मेरुरुभयत्र विनिर्गत: ॥
अनेक रत्नों के समूह से परिपूर्ण जाम्बूनद (स्वर्णनदी) से युक्त भूगोल के मध्य में गया हुआ तथा पृथ्वी के दोनों भाग (उत्तर-दक्षिण) में निकला हुआ मेरु पर्वत है।
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