मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 33
पातालभूमय: तदन्तरपुटा: सप्त नागासुरसमाश्रया: । दिव्यौषधिरसोपेता रम्या: पातालभूमय: ।।
पृथ्वी के आन्तरिक भाग में नाग और असुरों के आश्रय रूप में तथा दिव्य औषधियों (प्रकाश युक्त वनस्पतियों) एवं रसों से युक्त अतिसुन्दर सात पाताल भूमि हैं। (यहाँ पृथ्वी के अन्तरपुट में सात पाताल भूमियों का उल्लेख है जो व्यावहारिक दृष्टि से असंगत हैं क्‍योंकि पृथ्वी के भीतरी भाग में ऐसा खोखला स्थान नहीं है जहाँ कोई नगरी बस सके । अत: यहाँ "तदन्तरपुटा" का अर्थ "पृथिव्या अन्तरपुटा" न लेकर "अण्डकटाहस्यान्तरपुटा सप्तपातालभूमय:" इस प्रकार का अन्वय करने से ही संगति हो सकती है। यहाँ अण्डकटाह के अन्दर ही अनेक लोकों की कल्पना युक्तिसंगत हो सकती है।)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें