मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 30
ब्रह्मण्डाभ्यन्तरे सर्वेषामवस्थानम्‌ ब्रह्माण्डमध्ये परिधिव्योमकक्षाउभिधीयते । तन्मध्ये भ्रमणं भानामधो5्ध: क्रमशस्तथा ॥
ब्रह्माण्ड (अण्ड कटाह) की भीतरी परिधि कक्षा या आकाश कक्षा कही गई हैं। उसके मध्य में अधोध: (एक दूसरे से नीचे) क्रम से नक्षत्रादि भ्रमण करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें