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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 29
ब्रह्माण्डमेतत्‌ सुषिरं तत्रेदं भूर्भुवादिकम्‌ । कटाहद्वितयस्यैव सम्पुटं. गोलकाकृति: ॥
यह ब्रह्माण्ड अण्ड के मध्य का अत्यन्त विस्तृत छिद्र है। अर्थात्‌ दो अण्ड कटाहों के मध्य का विशाल रिक्त स्थान अनन्त आकाश संज्ञक हैं। दो अण्ड कटाहों द्वारा सम्पुट होने से यह गोल आकृति वाला है। इसी के मध्य में भूर्भुवादि लोक अवस्थित हैं।
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