तत्पश्चात (ग्रहनक्षत्र आदि की सृष्टि के अनन्तर) ब्रह्मा ने उत्तम, मध्यम, अधम स्रोतों से सत्व-रज-तम स्वरूप त्रिगुणात्मक प्रकृति की रचना कर देव आदि (देव-मनुष्य-असुर-पशु-पक्षि-वृक्ष-छता प्रभूति) चर-अचर (चेतन-जड़) विश्व की रचना की।
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