मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 26
चराचराणां सृष्टि: ततश्चराचरं विश्व निर्ममे देवपूर्वकम्‌ । ऊर्ध्वमध्याधरेभ्योज्थ स्रोतोभ्य: प्रकृती: सूजनू ॥
तत्पश्चात (ग्रहनक्षत्र आदि की सृष्टि के अनन्तर) ब्रह्मा ने उत्तम, मध्यम, अधम स्रोतों से सत्व-रज-तम स्वरूप त्रिगुणात्मक प्रकृति की रचना कर देव आदि (देव-मनुष्य-असुर-पशु-पक्षि-वृक्ष-छता प्रभूति) चर-अचर (चेतन-जड़) विश्व की रचना की।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें