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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 25
राशिनां नक्षत्रणाज्चोत्पत्ति: पुनर्द्दादशधाऊत्मानं विभजेद्‌ राशिसंज्ञकम्‌ । नक्षत्ररूपिणं भूय: सप्तविंशात्मकं वशी ॥
इस प्रकार ब्रह्मा जिनके वशीभूत समस्त सृष्टि है उन्होंने अपने आप (ब्रह्माएड) को द्वादश भागों में विभक्त कर दिया जो राशि संज्ञक हुये। तथा पुन: उस ब्रह्माण्ड को सत्ताइस भागों में विभक्त किया तो वे नक्षत्र संज्ञक हुये।
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