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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 24
पञ्चमहाभूतात्‌ सूर्यादीनामुत्पत्ति: अग्नीषोमौ भानुचन्द्रो ततस्त्वड्भरारकादय: । तेजोभूखाम्बुवातेभ्य: क्रमश: पञ्च जज्ञषिरे ॥
अग्नि सोमात्मक सूर्य और चन्द्रमा की उत्पत्ति हुई। अर्थात्‌ अग्नि स्वरूप (तैजस-पिण्ड) सूर्य की तथा सोम (अमृत) स्वरूप (जलमय-पिण्ड) चन्द्र की उत्पत्ति हुई। तदनन्तर क्रमश: तेज (अग्नि) महाभूत से मंगल, भू (पृथ्वी) से बुध, आकाश से बृहस्पति, जल से शुक्र तथा वायु से शनि की उत्पत्ति हुई।
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