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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 23
पठ्चमहाभूतोत्पत्ति: मनस: खं ततो वायुरग्निरापो धरा क्रमात्‌ । गुणैकवृद्धया पञ्चेति महाभूतानि जक्षिरे ॥
(उस) ब्रह्मा के मन से आकाश, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल तथा जल से पृथ्वी की क्रमश: उत्पत्ति हुई। एक-एक गुणों की वृद्धि से ये पाँचों पञ्च महाभूत कहे गये हैं।
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