तदनन्तर अहंकार मूर्ति रूपी ब्रह्मा ने सृष्टि रचना का मन में विचार किया। ब्रह्म के मन से चन्द्रमा की उत्पत्ति हुई तथा नेत्रों से प्रकाशात्मा (प्रकाश स्वरूप) सूर्य की उत्पत्ति हुई।
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