उस समस्त लोकों के पितामह (ब्रह्मा) को श्रेष्ठ वेदों को प्रदान कर तथा उन्हें अण्ड के मध्य में स्थापित कर स्वयं भगवान् (सूर्य) समस्त विश्व को प्रकाशित करते हुये परिभ्रमण करने लगे।
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