मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 20
त्रिपादममृतं गुह्यं पादोज्यं प्रकटोड्भवत्‌ । सो5हड्ढारं जगत्सृष्ट्यै ब्रह्माणमसृजत्‌ प्रभु: ॥
भगवान्‌ सूर्य के तीन पाद अमृत हैं, अर्थात्‌ कभी नष्ट न होने वाले हैं, इसलिए वे अगम्य हैं। एक चतुर्थ पाद से ही प्रकट (दृश्य) हैं। उसी (सूर्य) भगवान्‌ ने अहंकार स्वरूप ब्रह्मा को संसार की सृष्टि के लिए उत्पन्न किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें