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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 19
रथे विश्वमये चक्र॑ कृत्वा संवत्सरात्मकम्‌ । छन्दांस्यश्वा: सप्त युकता: पर्य्यटत्येष सर्वदा ।।
विश्वरूपी रथ में संवत्सर (वर्ष) का चक्र लगाकर तथा छन्द-रूपी अश्वों को युक्त कर भगवान्‌ सूर्य सदैव पर्यटन (भ्रमण) करते रहते हैं।
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