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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 18
त्रयीमयोज्यं भगवान्‌ कालात्मा कालकृद्विभु: । सर्वात्मा सर्वग: सूक्ष्म: सर्वमस्मिन्‌ प्रतिष्ठितम्‌ ॥
यहीं भगवान्‌ वेदत्रयी के रूप में भी हैं ये ही काल की आत्मा हैं, काल के कर्ता हैं और स्वयं प्रकाश हैं। सभी प्राणियों की आत्मा हैं सर्वत्रव्यापी एवं सूक्ष्म हैं तथा सब कुछ इन्हीं में प्रतिष्ठित है।
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