यहीं भगवान् वेदत्रयी के रूप में भी हैं ये ही काल की आत्मा हैं, काल के कर्ता हैं और स्वयं प्रकाश हैं। सभी प्राणियों की आत्मा हैं सर्वत्रव्यापी एवं सूक्ष्म हैं तथा सब कुछ इन्हीं में प्रतिष्ठित है।
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