पर ज्योतिस्तम: पारे सूर्योड्यं सवितेति च ।
पर्येति भुवनान्येष भावयन् भूतभावन: ॥
परम ज्योतिसम्पन्न होने के कारण इन्हें सूर्य तथा अन्धकार से परे होने से (अन्धकार को नष्ट करने से) सविता कहते हैं। ये भगवान् भूतभावन (प्राणियों का पोषण करने वाले) समस्त भुवनों को प्रकाशित करते हुये परिभ्रमण कर रहे हैं।
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