यही भगवान् हिरण्य गर्भ हैं जिनका वेदों में उल्लेख है। सर्वप्रथम (आदिभूत) उत्पन्न होने से इन्हें आदित्य तथा अण्ड से प्रसूत होने के कारण सूर्य कहा गया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।