तदण्डमभवद् हैम॑ सर्वत्र तमसावृतम् ।
तत्रानिरुद्ध: प्रथम व्यक्तीभूत: सनातन: ॥
वह बीज स्वरूप तेज स्वर्ण अण्ड का रूप धारण कर लिया। वह चारों तरफ से अन्धकार से घिरा हुआ था। वहाँ (अण्ड के भीतर) सर्वप्रथम सनातन भगवान् अनिरुद्ध प्रकट हुये।
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