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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 11
अध्यायमहात्म्यम्‌ श्रुणुष्वेकमना भूत्वा गुह्ममध्यात्मसंज्ञितम्‌ । प्रवक्ष्याम्यतिभक्तानां नादेयं विद्यते मम ॥
सूर्याश पुरुष ने मय को संबोधित करते हुये कहा - “एकाग्रचित्त होकर सुनो! मै अत्यन्त गुह्य (रहस्यमय) अध्यात्म संज्ञक शास्त्र को कह रहा हूँ। मेरे पास अतिभक्तों (जिज्ञासु शिष्यों) के लिए कुछ भी अदेय नहीं है।"
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