सूर्य और चन्द्रमा की क्रान्तिज्या को पृथक-पृथक त्रिज्या से गुणाकर दोनो में परमक्रान्तिज्या का भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो उनके चापों के अन्तर को अथवा अन्तर के आधे को गत-गम्य पातों के अनुसार चन्द्रमा में हीन युत करने से अभीष्ट चन्द्रमा होता है।
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