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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 8
ऊना चेत्‌ स्यात्‌ तदा भावी वाम॑ युग्मपदस्य च। पदान्यत्व विधो: क्रान्तिर्विक्षिपाच्चेद्रिशुद्धयति ॥
समपद में चन्द्रमा हो तो इससे विपरीत अर्थात्‌ सूर्य की क्रान्ति से चन्द्र की क्रान्ति यदि न्‍्यून हो तो गत पात, अधिक हो तो गम्यपात होता है। भिन्न दिशा के शर में चन्द्रक्रान्ति घट जाने पर चन्द्रमा का पद भिन्न होता है।
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