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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 5
पातस्वरूपम्‌ स॒कृष्णो दारुणवपुलेहिताक्षो महोदर: । सर्वानिष्टकरो रौद्रो भूयों भूय: प्रजायते ॥
कृष्णवर्ण वाला, कठोर एवं भयंकर शरीरवाला, लाल नेत्रों से युक्त, विशाल उदरवाला, सबका अनिष्ट करने वाला भयानक वह (अग्निपुरुष रूपी पात) बारबार उत्पन्न होता है। (प्रायः: एक मास में दो बार पात की स्थिति आती है।)
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