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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 23
उपसहार: इत्येतत्‌ परम पुण्य ज्योतिषां चरितं हितम्‌ । रहस्य महदाख्यात॑ किमन्यच्छोतुमिच्छसि ।। ॥ सूर्यसिद्धान्ते पाताधिकार: सम्पूर्ण: ॥
हे मयासुर! यह सब कुछ परम पवित्र, ग्रह नक्षत्रादिकों का रहस्यमय महान चरित्र तुम्हारे लिए मैंने कहा, अब इससे अतिरिक्त और क्या सुनना चाहते हो?
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