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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 22
व्यतीपातत्रयं घोर गण्डान्तत्रितयं तथा । एतद्‌ भसन्धित्रितयं सर्वकर्मसु वर्जयेत्‌ ॥
व्यतीपातत्रय, वैधृतित्रय, गण्डान्तत्रय और भसन्धित्रय ये सब घोर अर्थात्‌ अशुभ हैं। अतः ये चारों घोर संज्ञक संपूर्ण शुभ कर्मों में वर्जित हैं।
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