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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 21
गण्डान्त लक्षणम्‌ सार्पेन्द्रपौष्ण्यधिष्ण्यानामन्त्या: पादा भसन्धय: । तदग्रभेष्वाद्यपादोीं गण्डान्तं नाम कीच्यते ॥
आश्लेषा, ज्येष्ठा तथा रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण को भसन्धि कहते हैं। इनसे अग्रिम नक्षत्रों मघा, मूल और अश्विनी नक्षत्रों के प्रथम चरण को गण्डान्त कहते हैं।
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