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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 19
पाते विशेष: रवीन्द्रोस्तुल्यता क्रान्त्योर्विषुवत्सन्निधौ यदा । द्विर्भवेद्धि तदा पात: स्यादभावो विपर्ययात्‌ ॥
विषुवट्वृत्त की सन्निधि में अर्थात्‌ गोलसन्धि के आसन्न में सूर्य और चन्द्र की क्रान्ति समान हो तो व्यतीपात-वैधृति भेदद्वयात्मक पात दो बार होगा। चन्द्र की अयन सन्धि के निकट यदि सूर्य की क्रान्ति से चन्द्र की क्रान्ति न्यून हो तो पात का अभाव होता है।
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