मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 18
सस्‍्नानदानजपकश्राद्धवत्रतहहोमादिकर्मभि: । प्राप्पते सुमहच्छेयस्तत्‌ कालज्ञानतस्तथा ।।
उस (पात) काल में स्नान, दान, जप, श्राद्ध एवं अभीष्ट देवता की आराधना और होम आदि धर्म क्रिया करने से अत्यन्त पुण्य प्राप्त होता है। उस काल के जानने वाले (ज्योतिषी) को स्नान, दान आदि के तुल्य पुण्य स्वत: ही प्राप्त हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें