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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 15
पातकाल: स्फूटो मध्य: सोऊपि स्थित्यर्धवर्जित: । तस्य सम्भवकाल: स्यात्‌ तत्संयुक्तोअ्न्त्यसज्ञित: ॥
पूर्वोक्त (स्थिरीकृतार्धरात्रेन्द्रो - इत्यादि) प्रकार से साधित स्पष्टपातकाल ही पात का मध्यकाल कहा गया है। इसमें स्थित्यर्ध घटिका घटाने से पात का आरम्भ काल तथा जोड़ने से पात का अन्तकाल अर्थात्‌ निवृत्तिकाल होता है।
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