मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 11 • श्लोक 10
शोध्यं चन्द्रादगते पाते तत्सूर्यगतिताडितम्‌ । चन्द्रभुक्त्या हृतं भानौ लिप्तादि शशिवत्‌ फलम्‌ ॥
इस चन्द्र सम्बन्धिफल (चापान्तर वा चापान्तरार्ध) को सूर्य की गति से गुणाकर चन्द्र की गति का भाग देने से प्राप्त लब्धि को सूर्य में चन्द्रमा की तरह युत हीन करने से सूर्य होता है। ऐसे ही चन्द्र सम्बन्धी फल को चन्द्रषात की गति से गुणाकर चन्द्रगति का भाग देने से जो फल आवे उसका पात में विलोम संस्कार (अर्थात्‌ चन्द्रमा में धन किया हो तो पात में ऋण और हीन किया हो तो युत ) करने से चन्द्रपात होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें