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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 10 • श्लोक 8
शेष॑ लम्बज्यया भक्‍तं लब्धो बाहु: स्वदिड्मुख:। कोटि: शडकुस्तयोरवरर्गयुतेर्मूल श्रुतिर्भवेत्‌ ॥
द्वादशांगुल शंकु कोटि होती है। इन दोनों के वर्गयोग का वर्गमूल लेने से श्रृड़ोन्नति में कर्ण होता है।
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