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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 10 • श्लोक 13
तन्मध्यसूत्रसंयोगाद्‌ बिन्द्र॒त्रिस्‍्पृूण लिखेद्धनु: । प्रागूबिम्बं यादृगेव स्यात्‌ तादृक्‌ तत्र दिने शशी ॥
उनके मुखपुच्छगत रेखाओं के सम्पात विन्दु को केन्द्र मानकर शुक्लाग्र और दक्षिणोत्तर चिहनों को स्पर्श करते हुए चाप से निर्मित चन्द्रवृत्त क्षेत्रस्थ चापच्छेद से यहाँ जैसा दीखता है वैसा ही उस दिन आकाश में भी चन्द्रमण्डल दीखेगा।
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