मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 10 • श्लोक 12
शुक्् कर्णेन तद्ठिम्बयोगादन्तर्मुख॑ नयेत्‌ । शुक्लाग्रयाम्योत्तरयोर्मध्ये मत्स्यौ प्रसाधयेत्‌ ।।
अर्थात्‌ चन्द्रबिम्बपरिधि एवं कण्रिखा के योग को पूर्व तथा कर्ण रेखा को अपने मार्ग में बढ़ाने से दूसरे भाग में चन्द्र बिम्बपरिधि में जहाँ स्पर्श करे वहाँ पश्चिम दिशा कल्पना कर इनसे दक्षिण और उत्तर दिशा का साधन करना चाहिए। फिर चन्द्रबिम्बपरिधि और कण्रिखा के सम्पात विन्दु से कण्रिखा के मार्ग से चन्द्रबिम्ब केन्द्र की ओर पूर्व साधित शुक्ल अंकित कर शुक्‍लाग्र और दक्षिणोत्तर चिहनों से दो मत्स्य बनाकर
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें