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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 10 • श्लोक 11
कोटिकर्णयुताद्बिन्दोर्बिम्ब॑ तात्कालिकं लिखेत । कर्णसूत्रेण दिक्सद्धि. प्रथमं परिकल्पयेत्‌ ॥
कोटिकर्ण के योग विन्दु को केन्द्र मानकर तात्कालिक अंगुलात्मक चन्द्रबिम्ब व्यासार्द्ध से चन्द्रमण्डल बनाकर कर्णरेखा से दिकूसाधन करना चाहिए।
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