कोटिकर्ण के योग विन्दु को केन्द्र मानकर तात्कालिक अंगुलात्मक चन्द्रबिम्ब व्यासार्द्ध से चन्द्रमण्डल बनाकर कर्णरेखा से दिकूसाधन करना चाहिए।
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