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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 10 • श्लोक 1
चन्द्रस्य दृश्याद्रयत्वम्‌ उदयास्तविधि: प्राग्वत्‌ कर्तव्य: शीतगोरपि । भागैद्गदिशभि: पश्चादू्‌ दृश्य: प्राग्‌ यात्यदृश्यताम्‌ ॥
चन्द्रमा के भी उदय और अस्त का साधन पूर्वोक्त विधि से करना चाहिए। चन्द्रमा १२ अंशों (कालांशों) तक सूर्य से अन्तरित होकर पश्चिम में उदित और पूर्व दिशा में अस्त होता है।
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