चन्द्रमा के भी उदय और अस्त का साधन पूर्वोक्त विधि से करना चाहिए। चन्द्रमा १२ अंशों (कालांशों) तक सूर्य से अन्तरित होकर पश्चिम में उदित और पूर्व दिशा में अस्त होता है।
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