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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 70
एवं त्रिघनरन्ध्रार्करसार्कार्का दशाहता: । चन्द्रादीनां क्रमादुक़्ता मध्यविक्षेपलिप्तिका:॥ इति श्रीसकलगणकसार्व भौमवल्लालदैवज्ञात्मजरड्रनाथगणकविरचिते गूढ़ार्थप्रकाशके मध्यमाधिकार: पूर्ण: ॥
इस प्रकार ३ का घन अर्थात्‌ २७, ९, १२, ६, १२, १२ को दश से गुणा करने पर क्रम से चन्द्रादि ग्रहों की विक्षेप कला होती है। यथा--- चन्द्रमा की २७ x १० = २७० मंगल की ९ x १० = ९० बुध की १२ x १० = १२० गुरु की ६ x १० = ६० शुक्र की १२ x १० = १२० शनि की १२ x १० = १२० विक्षेप कला सिद्ध होती है।
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