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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 69
तनन्‍नवाशं द्विगुणितं जीवस्त्रिगुणितं कुज:। बुधशुक्रार्कजा: पातैवर्विक्षिप्यन्ते चतुर्गुणम्‌ ॥ ६
चन्द्रमा के विक्षेप (२७००) के द्विगुणित नवमांश (२७० x २)/९ = ६० तुल्य गुरु उत्तर एवं दक्षिण तक आकृष्ट होता है। चन्द्र विक्षेप के त्रिगुणित नवमांश (२७० x ३)/९ = ९० तुल्य स्वस्थान से मंगल उत्तर एवं दक्षिण अपकृष्ट होता है। इसी प्रकार बुध, शुक्र और शनि चन्द्र विक्षेप के चतुर्गुणित नवमांश तुल्य अर्थात्‌ (२७० x ४)/९ = १२० तुल्य स्वक्रान्ति स्थान से उत्तर और दक्षिण अपने-अपने पातों द्वारा हटा दिये जाते हैं।
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