चन्द्रमा अपने पात (क्रान्ति मण्डल चन्द्रविमण्डल के सम्पात) स्थान के प्रभाव से क्रान्ति वृत्तीय अपने मध्य स्थान से भचक्रकला (२१६०० कला) के ८०वें (अर्थात् २१६०० + ८० > २७०) भाग तुल्य दूरी तक उत्तर और दक्षिण में विक्षिप्त होते (बलात् हट जाते) हैं।
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