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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 1 • श्लोक 67
इष्टकालिकग्रहसाधनम्‌ इष्टनाडीगुणा भुक्ति: षष्ट्या भकक्‍ता कलादिकम्‌ । गते शोध्य युतं गम्ये कृत्वा तात्कालिको भवेत्‌ ॥
ग्रह की मध्यम गति कला को इष्ट घटी से गुणा कर ६० का भाग देने से जो कलादि लब्धि हो उसे गत इष्ट घटी होने पर मध्यरात्रि कालिक ग्रह में घटाने तथा गम्य इष्टघटी हो तो मध्यरात्रि कालिक ग्रह में जोड़ने से इष्टकालिक ग्रह होता है।
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